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चंदा चोरी और वोट चोरी पर जवाबदेही की मांग 20 अक्टूबर से दिग्विजय सिंह करेंगे सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा

चंदा चोरी और वोट चोरी पर जवाबदेही की मांग 20 अक्टूबर से दिग्विजय सिंह करेंगे सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा

प्रेस विज्ञप्ति

चंदा चोरी और वोट चोरी पर जवाबदेही की मांग, 20 अक्टूबर से दिग्विजय सिंह करेंगे सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा से जुड़ने के लिए पैंफलेट, टोल फ्री नंबर और डिजिटल पिटीशन भी लॉन्च किया।

दिनांक 07 अक्टूबर 2026

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर निकल रहे हैं। शिवधाम (उज्जैन) से रामधाम (अयोध्या) तक होने वाली 950 किमी की इस यात्रा से जुड़ने के लिए उन्होंने बुधवार को टोल फ्री नंबर (8982121282) पैम्फलेट और डिजिटल पिटीशन https://www.change.org/Vote_Chanda_Chori लॉन्च किया।

पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने बुधवार को अपनी पत्नी अमृता राय के साथ भोपाल में संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया। सिंह दंपती इससे पहले 3,200 किमी की पैदल नर्मदा परिक्रमा कर चुके हैं। प्रेस को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश के सामने आज दो बड़े मुद्दे हैं, एक ‘वोट चोरी’, जिससे लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, और दूसरा ‘चंदा चोरी’, जिससे लोगों की धार्मिक आस्था और विश्वास प्रभावित हो रहा है। इन दोनों मुद्दों पर पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग को लेकर मैं सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा निकाल रहा हूं।

यात्रा का स्वरूप बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने कहा कि 20 अक्टूबर 2026 को उज्जैन के महाकाल मंदिर से प्रारंभ होकर ओरछा के रामराजा सरकार मंदिर से होते हुए अयोध्या के श्रीराम मंदिर तक पहुंचेगी। यह एक शांतिपूर्ण जन-जागरण यात्रा होगी। हमारी यात्रा किसी धर्म, संप्रदाय या व्यक्ति के विरुद्ध नहीं है। हम समाज से कहना चाहते हैं, मंदिर हमारी आस्था के केंद्र हैं। श्रद्धालुओं का चढ़ावा और दान उनकी मेहनत और श्रद्धा से आता है। उस धन की रक्षा करना और उसका पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

सिंह ने बताया कि हमारी इस “सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा” में एक व्यक्ति अपने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) लेकर चलेगा और एक व्यक्ति धर्म ध्वज, जिसे इंद्र ध्वज भी कहा जाता है (पचरंगा), लेकर चलेगा। पचरंगे झंडे के पांच रंगों का क्रम रहेगा: लाल — पीला — काला — सफेद — हरा। उन्होंने ध्वज में शामिल लाल रंग को शक्ति, ऊर्जा, साहस और संकल्प का प्रतीक बताया। पीले रंग को ज्ञान, प्रकाश, पवित्रता और विवेक का प्रतीक, काले रंग को गंभीरता, तप, अंधकार के बोध और उस अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का संकल्प बताया। उन्होंने सफेद रंग को सत्य, शांति, शुद्धता और सात्त्विकता का प्रतीक तथा हरे रंग को प्रकृति, जीवन, सृजन, पर्यावरण और समृद्धि का प्रतीक बताया। सिंह ने कहा कि इस प्रकार हमारा पचरंगा ध्वज शक्ति, ज्ञान, आत्मचिंतन, शांति और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश लेकर चलेगा।

उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का ध्येय वाक्य "यतो धर्मस्ततो जयः" यात्रा का ध्येय वाक्य होगा। जिसका अर्थ है जहां धर्म (सत्य और न्याय) है वहीं विजय है। यदि हम सत्य के साथ हैं यदि हम न्याय के साथ हैं यदि हम ईमानदारी के साथ हैं यदि हम धर्म स्थलों की पवित्रता की रक्षा के लिए खड़े हैं तो हमारा मार्ग धर्म का मार्ग है।

पूर्व सीएम ने बताया कि सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा उज्जैन से अयोध्या तक  कुल 930 किमी की यात्रा है जो मध्यप्रदेश में उज्जैन से प्रारंभ होकर तराना, शाजापुर, सारंगपुर, खुजनेर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर, चंदेरी, तालबेहट (उत्तरप्रदेश), जेरोन, ओरछा, होते हुए उत्तरप्रदेश के चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात, बाराबंकी होते हुए अयोध्या पहुंचेगी।

इस दौरान सिंह की पत्नी अमृता राय ने कहा कि जब दिग्विजय सिंह ने उनके सामने यह प्रस्ताव रखा कि वे उज्जैन से अयोध्या यात्रा करना चाहते हैं, तो उन्हें लगा कि यह अच्छा विचार है और हमें इसे प्रमोट करना चाहिए।
अमृता राय ने सिंह के व्यक्तित्व पर बात करते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह को एक व्यक्ति के रूप में अपने संकल्पों के लिए देखा जाएगा तो वे अपने संकल्पों में सतपुड़ा के समान हैं। जिस तरह विशाल, लंबी और अडिग रहने वाली पर्वत श्रृंखला के रूप में हम सतपुड़ा को देखते हैं वैसा ही व्यक्तित्व दिग्विजय सिंह का है। 

अमृता राय ने आगे कहा कि आचार और व्यवहार में दिग्विजय सिंह नर्मदा की तरह निर्मल हैं और सरल हैं, इतने सरल कि आप उन्हें मोड़ भी सकते हैं। उनकी निर्मलता में इतनी सादगी है कि मुझे लगता है राजनेता इतना सरल कैसे हो सकता है। मैंने पत्रकारिता में रहते हुए यही समझा था कि राजनेता जटिल होते हैं, लेकिन दिग्विजय सिंह के व्यवहार और आचरण में कोई जटिलता नहीं पाई। उनमें दृढ़ता जरूर पाई है। दृढ़ता तो इतनी है कि लाख अपनी बात मनाओ तो नहीं मानते, जो उनके दिल में आया वही करते हैं।

यात्रा की प्रमुख मांगें

(1) श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए और श्रीराम मंदिर की व्यवस्था का दायित्व पूर्व में बने रामालय ट्रस्ट को सौंपा जाए, जिसमें सभी पीठों के पूज्य शंकराचार्य गण, रामानंद संप्रदाय के संत गण, निर्मोही अखाड़े के प्रमुख एवं गोरखनाथ मठ के प्रतिनिधि विशेष रूप से सम्मिलित हों।

(2) राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी की ताजा घटनाओं में ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव, कोषाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करवाया जाए तथा उन्हें भी आरोपी बनाया जाए।

(3) राम मंदिर ट्रस्ट में किसी भी राजनेता या सांप्रदायिक संगठनों के सदस्यों को न तो पदाधिकारी बनाया जाए और न ही उन्हें कोई दायित्व सौंपा जाए।

(4) देश के प्रधानमंत्री राम मंदिर में हुई चोरी और श्रद्धालुओं की आस्था पर पहुंची गंभीर चोट के विषय में मौन साधे हुए हैं। उनका यह मौन अनेक स्वाभाविक प्रश्न और संदेह उत्पन्न करता है, क्योंकि शास्त्रों में कहा गया है—“मौनं स्वीकृति लक्षणम्।”

(5) हमारी मांग है कि महाकाल मंदिर, उज्जैन, रामराजा मंदिर, ओरछा और श्री राम जन्मभूमि मंदिर सहित देश के प्रमुख धर्मस्थलों और उनसे जुड़े ट्रस्टों तथा सार्वजनिक परियोजनाओं में नियमित स्वतंत्र ऑडिट हो, आय-व्यय सार्वजनिक हो, दान एवं चढ़ावे का पारदर्शी हिसाब हो, जमीनों के प्रत्येक बड़े लेन-देन की जानकारी सार्वजनिक हो, निर्माण कार्यों और ठेकों में पारदर्शिता हो और जहां भी प्रथम दृष्टया अनियमितता मिले, वहां निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई हो। भगवान का नाम राजनीति, निजी लाभ या भ्रष्टाचार का माध्यम नहीं बनना चाहिए।

(6) प्रधानमंत्री को हमारी मांगों के अनुरूप निष्पक्ष और ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए, पूरे प्रकरण में पारदर्शिता स्थापित करनी चाहिए और यह सिद्ध करना चाहिए कि आस्था के नाम पर किसी भी प्रकार की लूट, भ्रष्टाचार या अनियमितता को संरक्षण नहीं दिया जाएगा। ऐसा करके वे न्याय, जवाबदेही और धार्मिक आस्था के सम्मान का एक उत्कृष्ट तथा न्यायसंगत उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं।

प्रति,

माननीय संपादक महोदय,
सादर प्रकाशनार्थ।

द्वारा 

कार्यालय

माननीय श्री दिग्विजय सिंह जी,
पूर्व मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश।

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