Digvijaya Singh
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भागीरथपुरा कांड में दूषित पानी से 23 परिवार उजड़ गए लेकिन आज तक जिम्मेदारी तय नहीं हुई

भागीरथपुरा कांड पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद श्री दिग्विजय सिंह जी का बयान :

"आज भी भागीरथपुरा कांड, जिसमें लगभग 23 परिवारों में मौतें हुई हैं दूषित पेयजल पीने के कारण, उस पर कोई ज़िम्मेदारी तय नहीं हो पाई है।
​मेरा ये निश्चित मत है कि जब तक पब्लिक हियरिंग के साथ न्यायिक जांच नहीं होगी, तब तक ज़िम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। कुछ छोटे-छोटे कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, तबादला किया गया है, लेकिन जो निर्णय करने वाली शक्तियां हैं, उन पर क्या कार्रवाई हुई? कोई कार्रवाई नहीं।
​अब अलग-अलग लोगों के बारे में आज चर्चा होती है।
​पहला पक्ष: एक वर्ग कहता है कि मुख्यमंत्री जी का ये आदेश है अधिकारी-कर्मचारियों को कि महापौर और स्थानीय नेताओं की बात सुनने की आवश्यकता नहीं है, वहां जो तुम ठीक समझते हो वो करो—ये एक बात सामने आई।

दूसरी बात ये सामने आई है कि महापौर जी और जो हमारे भारतीय जनता पार्टी के पार्षद और बड़े-बड़े नेता हैं, वो मंद स्वरों में शिकायत करते हैं कि साहब हमारे अधिकारी सुनते नहीं हैं। और उस बात को ये बल देते हैं कि मुख्यमंत्री जी का आदेश है कि आपको किसी की बात सुनने की आवश्यकता नहीं है, ये दूसरा वर्ज़न है। जो तीसरा वर्ज़न है अधिकारी-कर्मचारियों के बीच का, वो ये है कि साहब इसके अंदर निर्णय हो गया था 2022 में कि ये पाइपलाइन चेंज होना चाहिए। बजट भी था, ठेका देने के लिए टेंडर निकाला, टेंडर भी निकल गया। लेकिन टेंडर मंज़ूर क्यों नहीं हुआ? क्योंकि वार्ड मेंबर के चहेते अलग ठेकेदार हैं, महापौर जी के ठेकेदार और हैं, और बड़े नेताओं के चहेते ठेकेदार और हैं। ​बात यही है कि ये पूरा जो घटनाक्रम है, उसके लिए पूरी भारतीय जनता पार्टी के शासन के ज़िम्मेदार लोग उसके लिए दोषी हैं। और ये तब तक साबित नहीं होगा जब तक किसी भी उच्च न्यायालय के अध्यक्षता में ज्यूडिशियल इंक्वायरी नहीं होगी और वो पब्लिक हियरिंग नहीं होगी।
​पब्लिक हियरिंग होना चाहिए जिसमें शासकीय दस्तावेज़ों को पब्लिक किया जाना चाहिए, तभी जाकर तय हो पाएगा कि आख़िर इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है। क्या माननीय मुख्यमंत्री जी आप साहस दिखाएंगे कि इस पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जांच हो, पब्लिक हियरिंग हो और दोषी व्यक्तियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो? ​अगर निर्णय लेने में मेयर-इन-काउंसिल और महापौर की ग़लती है तो उन पर भी उनके इस्तीफ़े होने चाहिए। यदि प्रशासकीय अधिकारियों की ग़लती है तो उनको दंडित किया जाना चाहिए और ये बात भी साफ़ होना चाहिए कि मुख्यमंत्री जी किस प्रकार के आदेश हैं कि तुमको स्थानीय नेताओं की बात नहीं सुनना है।
​इन सब बातों के लिए एकमात्र विकल्प है ज्यूडिशियल इंक्वायरी, न्यायिक जांच, जिसमें कि पब्लिक हियरिंग के माध्यम से सारे जो सरकारी डॉक्यूमेंट्स हैं वो जनता के सामने ये सारी बातें आएं, तथ्य आएं, तभी जाकर हम पता लगा पाएंगे। मुझे उम्मीद है कि मुख्यमंत्री जी साहस दिखाएंगे।"

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