नर्मदे हर

सदियों से नर्मदा का गहरा धार्मिक महत्व रहा है। हमारे प्राचीन धर्मग्रंथो, पुराणों और साहित्य में नर्मदा को साक्षात् देवी कहा गया है। पतितपावनी माँ नर्मदा सर्वदा कल्याणकारी और मोक्षदायिनी है। माँ नर्मदा के प्रति मेरे मन में बचपन से गहरी आस्था रही है। लगभग 20 साल पहले मंडला के विश्रामगृह में रात्रि विश्राम के समय मुझे परिक्रमा करने की प्रेरणा हुई। मैं तभी से उपयुक्त अवसर की प्रतीक्षा में था जो लम्बे समय बाद अब मिल सका है। माँ नर्मदा ने मुझे 30 सितम्बर 2017 दशहरा पर्व से अपनी परिक्रमा का अवसर प्रदान किया है। इस परिक्रमा में मेरी धर्मपत्नी श्रीमती अमृता राय भी मेरे साथ रहेगी तथा हम इस परिक्रमा को निरंतर तथा पैदल ही सम्पन्न करेंगे। परिक्रमा अवधि के लिए मैं अपने को राजनीति से पूर्णतया पृथक रखने का प्रयास करूँगा । यह मेरी निजी, धार्मिक/आध्यात्मिक परिक्रमा है। मध्यप्रदेश तथा देशभर के अनेक लोगों ने मुझे इस परिक्रमा के लिए शुभकामनाएँ दी है। लाखों लोगों के अद्भुत प्यार को पाकर मैं अभिभूत हूँ। नर्मदा मैया की कृपा और आपके इस असीम प्यार से ही हम लगभग 3300 कि.मी. लम्बा यह पवित्र परिक्रमा पथ तय कर पाएँगे। आपके प्यार और सहयोग के लिए मैं सभी के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करता हूँ।

माँ नर्मदा सबको सुख, शांति, वैभव और यश प्रदान करे। सभी का कल्याण हो।

नर्मदे हर

(दिग्विजय सिंह)

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नर्मदा परिक्रमा में धार्मिक, सामाजिक एवं नैतिक अनुशासन का कड़ाई से पालन एवं स्वच्छता का पूर्ण ध्यान रखा जायेगा । नर्मदा परिक्रमा के दौरान किसी भी प्रकार के मादक पदार्थ का सेवन सख्ती से प्रतिबंधित होगा