हठी राजा हाथ में लाठी लेके निकल पडे. हैं कभी पीछे तो कभी आगे है श्रीमती अमृता .


Wednesday, 04,Oct 2017

"Why are students not taught that before the Wright brothers, an Indian called Shivkar Bapuji Talpade was the first to invent the airplane? This person invented the plane eight years before the Wright brothers. Are our students taught these things in IITs or not? They should be," These are the gems from our MHRD minister, Satyapal Singh while speaking at an award ceremony.

हठी राजा हाथ में लाठी लेके निकल पडे. हैं एक ऐसी गैरसियासी यात्रा पर जो हालिया सियासत के दौर में सियासती लोगों की जमात में सियासी ही समझी जाने वाली है. बीत पांच दिनों में हठी राजा की इस राजयोगी हठ के पीछे श्री दिग्विजय सिंह के भीतर जो जबर्दस्त आत्मविश्वास दिखाई देता है वह शब्दों कह पाना आसान नहीं है. सफेद कुर्ता- पायामा और उसपर काले रंग के पट्टे से कमर में लपेटा एक छोटे बटुआ किस्म की पेटी. एक छडी.नुमा लाठी ‍ काले जूते चश्मा और नव्वे के दशक वाली वही पुरानी मुस्कान. इस धार्मिक यात्रा में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अमृता राय के अलावा नव्वे के दशक तक लोकसभा में उनके ( श्री दिग्विजय सिंह ) समकालीन रहे श्री रामेशवर नीखरा के अलावा बहुत सारे स्थानीय जनप्रतिनिधित्व करने वाले श्री दिग्विजय सिंह के पुराने लोग इस यात्रा में उनके हमकदम हैं. इस यात्रा के दौरान बडी. संख्या में महिलायें भी उत्साहित दिखाई दे रही हैं.

श्री दिग्विजय सिंह राज्य के मुख्यमंत्री बनने से पहले ही राज्य की राजनीति में जनसंपर्क के महत्व को पहचान चुके थे. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वे जनता के बीच जब आते जाते थे तो सादा और बहुत कम कड.क कुर्ता – पाजामा और तीन रंगों के बार्डर वाला गमछा धारण करते रहे हैं. वे मुख्यमंत्री बनने के बाद के कुछ बर्षों तक तो अपनी सहज खिलखिलाहट और जोर से ठहाका लगाकर कम से कम वजन वाली राजनीतिक बातों का गंभीर अर्थ निकलवा पाने वाले गंभीर राजनीतिक प्रशासक के रूप में अपनी महारथ मनवा चुके हैं इसी लिये हठी राजा का कोई भी राजनीतिक या गैर-राजनीतिक संकल्प को कमतर आंकना राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनका जनसंपर्क / सूचनातंत्र से संबंधित वाली तमाम एजेंसियों की व्यवसायिक दक्षता की ही परीक्षा करायेगा.

बहरहाल यह जानना-बताना ज्यादा जरूरी है कि श्री दिग्विजय सिंह की सहधर्मिणी बनी श्रीमती अमृता राय इस यात्रा के दौरान क्या कर रहीं है. वे इस यात्रा में श्री दिग्विजय सिंह के पूरे समय साथ चलनें वाली हैं. वे पूर्ण भारतीय परिधान में उनके हमकदम हैं. वे पूरी सौम्यता और स्नेह पूर्वक यात्रा के दौरान सबसे मिलजुल रही हैं. महत्वपूर्ण यह है कि वे हठी राजा के इस हठयोग में पूरे विश्वास और शक्ति से भागीदारी करते हुए एक नवीन छवि हासिल कर रही हैं. वे बडी. और बुजुर्ग महिलवाओं के समक्ष आधा घूंघट भी करती हैं सो नर्मदा यात्रा में श्री दिग्विजय सिंह के इस महाजनसंपर्क यात्रा में वे श्री दिग्विजय सिंह की सारिथी ही रहने वाली है. वे यात्रा के दौरान हो रही प्रत्येक पूजा में अब तक पूरे मन से सहभागी रहीं. मां नर्मदा के आंचल की यह यात्रा उतनी सुगम नहीं है जितना दूर बैठकर इसे समझा जा रहा है. दरअसल ये आढे तिरछे रास्तों और पथरीली चट्टानों के गलियारों से होकर जाने वाली यात्रा है सो कभी राजा आगे होते हैं तो कभी कभी अमृता राय जी लेकिन सच में इस प्रकार की कठिन यात्रा का संकल्प किसी हठी राजा के ही बस की बात होती है.



श्री दिग्विजय सिंह संकल्पित मां नर्मदा की इस यात्रा के दौरान यात्रा के मकसद को लेकर श्री दिग्विजय सिंह के खेमें मे यह वैचारिक एकरूपता देखने में आ रही है कि इस यात्रा के लिये किसी भी प्रकार के व्हीआईपी अंदाज को तिलांजलि दी जानी चाहिये इसीलिये श्री सिंह का काफिला बडी. व्यवस्थाओं से बेखबर होकर आगे बढने लगा हे. इस काफिले के लोग बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि मां नर्मदा के आंचल में रहने खाने का प्रबंध तो कोई न कोई कर ही देगा यदि साथ में दिग्गी राजा खुद हैं तो ऐसे सवाल अर्थहीन हो जाते हैं. इसलिये बिना तामझाम और बिना बहुत बडे लावलश्कर के श्री दिग्विजय सिंह निकल पडे. है.सबने सोचा है कि अब वो होगा जो मां नर्मदा की इच्छा होगी. पूर्वमंत्री और राजा की यात्रा में अब तक झंडावरदार बने श्री राजकुमार पटेल ने बताया कि यात्रा हमारे आदरणीय श्री दिग्विजय सिंह जी मां नर्मदा की परिक्रमा यात्रा का जो संकल्प लिया उसमें नर्मदा आंचल के जनसामान्य लोग विभिन्न स्थानीय संस्थाओं से जुडे. लोग और कांग्रेस से जुडे लोग पूरे उत्साह से शामिल हैं. श्री पटेल ने प्रश्न किये जाने पर बताया इस यात्रा में श्री नरेन्द् लाहोटी एवं श्री सचिन वत्स के अलावा बहुत सारे स्थानीय लोग समूची व्यवस्था में लगे है. श्री पटेल नें कहा कि इस यात्रा के दौरान इसके मुख्य सूत्रधार श्री दिग्विजय सिंह जिस उर्जा के साथ मां नर्मदा के आंचल की पदयात्र कर रहे हैं उससे उनके संकल्प की शक्ति का पता चलता है.











पांचव दिन तक तेंदूखेडा के अंतर्गत आने वाला परिक्षेत्र से श्री मुलायम पटेल श्री सरेन्द्र ढिमोले, चौघरी गिरिजाशकर के अलावा गाडरवार से श्री दीनदयाल जी ,स्थापक जी, सुरेश राय, मनीश राय ,सुरेंनद्र पटेल , सुनीता पटेल , रविशेखर जायसवाल गाडरवाडा.आदि ने यात्रा में श्री सिंह का साथ दिया. राजा की यात्र के ताजा चित्रों से सहज अंदाज लगाया जा सकता है कि फिलहाल श्यामला पहाडी पर राज कर रहेश्री शिवराज सिंह चौहान के लिये यह यात्रा बहुत गंभीर चुनौती साबित होने वाली है.







श्री दिग्विजय सिंह की यात्र में भाई लक्षमण सिंह और पुत्र जयवर्धन भी आगे साथ रहने वाले हैं. लेकिन जनसंपर्क का जो उदाहरण राजा रख रहे हैं उसके परिणाम सत्तारूढ. राजनीतिक रूप से गंभीर होंगे.

नीरज ओमप्रकाश श्रीवास्तव की रपट

Originally Published at http://newsbiryani.com/?p=7269

***